श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी
श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी
गुरु ग्रन्थ साहिब पष्ठ 24 पर महला 1 में कहा है कि
‘‘फाई सुरत मलूकि वेश, उह ठगवाड़ा ठगी देश,
खरा सिआणा बहुता भार धाणक रूप रहा करतार’’
पष्ठ 731 पर महला 1 में कहा है कि:-
अंधुला नीच जाति परदेशी मेरा खिन आवै तिल जावै।
ताकी संगत नानक रहंदा किउ कर मूड़ा पावै।।
गुरु ग्रन्थ साहिब पष्ठ 24 पर महला 1 में कहा है कि
‘‘फाई सुरत मलूकि वेश, उह ठगवाड़ा ठगी देश,
खरा सिआणा बहुता भार धाणक रूप रहा करतार’’
पष्ठ 731 पर महला 1 में कहा है कि:-
अंधुला नीच जाति परदेशी मेरा खिन आवै तिल जावै।
ताकी संगत नानक रहंदा किउ कर मूड़ा पावै।।
गुरु ग्रन्थ साहेब, राग आसावरी, महला 1 के कुछ अंश -
साहिब मेरा एको है। एको है भाई एको है।
आपे रूप करे बहु भांती नानक बपुड़ा एव कह।। (प. 350)
जो तिन कीआ सो सचु थीआ, अमत नाम सतगुरु दीआ।। (प. 352)
गुरु पुरे ते गति मति पाई। (प. 353)
बूडत जगु देखिआ तउ डरि भागे।
सतिगुरु राखे से बड़ भागे, नानक गुरु की चरणों लागे।। (प. 414)
मैं गुरु पूछिआ अपणा साचा बिचारी राम। (प. 439)


गजब
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